एनसीएलटी ने सुभाष चंद्रा की संपत्ति बेचने-हस्तांतरित करने पर रोक लगाई, ₹22,006 करोड़ के दावों पर ₹6.5 करोड़ का समझौता रुका

नई दिल्ली। एस्सेल समूह के चेयरमैन सुभाष चंद्रा को ₹22,006 करोड़ के दावों का महज ₹6.5 करोड़ में निपटारा कराने की कोशिश को बड़ा झटका लगा है। राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) ने मंगलवार को चंद्रा को अपनी संपत्तियां बेचने या हस्तांतरित करने से रोक दिया। साथ ही इतनी बड़ी देनदारी के निपटारे की अनुमति देने वाले पिछले आदेश पर भी रोक लगा दी। न्यायाधिकरण ने कहा कि पुनर्भुगतान योजना के पक्ष में स्पष्ट बहुमत नहीं है, इसलिए आदेश को प्रभावी नहीं किया जा सकता।
एनसीएलटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति अनूपिंदर सिंह ग्रेवाल की अध्यक्षता वाली 5 सदस्यीय विशेष पीठ ने कहा कि मामले में चंद्रा और योजना का विरोध करने वाले कर्जदाताओं समेत सभी पक्षों को विस्तार से सुना जाएगा। अगली सुनवाई 23 सितंबर को होगी।

99.9% की कटौती पर कर्जदाताओं में टकराव
विवाद उस योजना को लेकर है, जिसके तहत चंद्रा की व्यक्तिगत गारंटी से जुड़े करीब ₹22,006 करोड़ के दावों का निपटारा सिर्फ ₹6.5 करोड़ में करने की अनुमति दी गई थी। यानी दावों में करीब 99.9 प्रतिशत की कटौती। 10 बैंकों और कर्जदाताओं ने योजना का समर्थन किया था, जबकि एचडीएफसी बैंक, एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस और केनरा बैंक समेत कुछ कर्जदाताओं ने इसका विरोध किया। विरोध करने वाले कर्जदाताओं के पास 20% से कम मताधिकार था। उनका कहना है कि प्रस्तावित वसूली बेहद कम है।
चंद्रा का कहना है कि ₹22,006 करोड़ उनकी व्यक्तिगत उधारी नहीं है। यह राशि एस्सेल समूह की कंपनियों के कर्ज के लिए दी गई व्यक्तिगत गारंटी से जुड़े दावों समेत अन्य देनदारियों को मिलाकर है। उनके अनुसार व्यक्तिगत गारंटी से जुड़े दावों की रकम करीब ₹3,990 करोड़ है।

एनसीएलटी के दो फैसले, फिर तीसरे सदस्य की मंजूरी
चंद्रा की व्यक्तिगत दिवाला कार्यवाही में एनसीएलटी के भीतर भी मतभेद सामने आए थे। सितंबर 2025 में न्यायिक सदस्य अशोक कुमार भारद्वाज ने पुनर्भुगतान योजना को मंजूरी दी थी, जबकि तकनीकी सदस्य रीना सिन्हा पुरी ने दावों और मतदान में अनियमितताओं का हवाला देकर इसे खारिज कर दिया था। मामला तीसरे सदस्य निलेश शर्मा के पास गया। उन्होंने 25 अगस्त को कुछ विवादित दावों को बाहर रखने और पात्र कर्जदाताओं का हिस्सा दोबारा तय करने की शर्त पर योजना को मंजूरी दी। लेकिन फैसलों को साथ पढ़ने पर भी स्पष्ट बहुमत नहीं बन पाया। इसके बाद 5 सदस्यीय विशेष पीठ गठित करनी पड़ी।

मामला एनसीएलएटी भी पहुंचा
योजना के विरोध में कर्जदाता अब राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) भी पहुंच गए हैं। कार्यवाहक अध्यक्ष न्यायमूर्ति योगेश खन्ना की अध्यक्षता वाली 3 सदस्यीय पीठ ने मंगलवार को मामले की सुनवाई की। सॉलिसिटर जनरल ने कर्जदाताओं से आगे अपील में बढ़ने या नहीं बढ़ने पर निर्णय लेने के लिए एक दिन का समय मांगा और बुधवार को फिर न्यायाधिकरण के समक्ष आने की बात कही।
एनसीएलटी ने पिछले सप्ताह योजना को मंजूरी देते समय कहा था कि चंद्रा के खिलाफ दिवाला प्रक्रिया जारी रहने पर कर्जदाताओं को संभवतः ₹6.5 करोड़ से भी कम वसूली हो सकती है। वहीं विरोधी कर्जदाताओं ने चंद्रा की घोषित संपत्ति की और जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि व्यक्तिगत गारंटी के समय घोषित संपत्ति का ब्योरा इस मामले में अहम है। ताजा आदेश के बाद अब चंद्रा की संपत्ति, दावों और पुनर्भुगतान योजना पर नए सिरे से सुनवाई का रास्ता खुल गया है।

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