इंदौर की सड़कों पर रफ्तार का कहर, बढ़ते हादसों ने खड़े किए गंभीर सवाल!

हर महीने औसतन 20 मौतें, बायपास सबसे खतरनाक इलाका, हालात चिंताजनक!

इंदौर। शहर में सड़क हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। साल 2026 की शुरुआत ही डरावने आंकड़ों के साथ हुई है। जनवरी और फरवरी के केवल दो महीनों में ही 41 लोगों की जान सड़क दुर्घटनाओं में जा चुकी है। यानी हर महीने करीब 20 लोग अपनी जान गंवा रहे हैं। ये आंकड़े शहर की ट्रैफिक व्यवस्था और सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
शहर में सबसे ज्यादा हादसे बायपास और उसके आसपास के क्षेत्रों में हो रहे हैं। यहां तेज रफ्तार से दौड़ते वाहन, अपर्याप्त निगरानी और अव्यवस्थित ट्रैफिक सिस्टम हादसों की बड़ी वजह बन रहे हैं। स्थिति और खराब तब हो जाती है जब कई जगहों पर स्ट्रीट लाइट बंद रहती हैं, जिससे रात के समय खतरा और बढ़ जाता है।

लापरवाही और अव्यवस्था बढ़ा रही जोखिम
सड़क किनारे भारी वाहनों की पार्किंग भी हादसों का बड़ा कारण बन रही है। ट्रक और डंपर अक्सर सड़कों के किनारे खड़े मिलते हैं, जिनसे टकराकर कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। पुलिस की कार्रवाई भी अक्सर केवल औपचारिकता बनकर रह जाती है, क्योंकि कुछ समय बाद हालात फिर पहले जैसे हो जाते हैं।

साल दर साल बढ़ते आंकड़े
पिछले कुछ वर्षों के आंकड़े इस समस्या की गंभीरता को साफ दिखाते हैं। 2023 में 282 लोगों की मौत हुई थी, जो 2024 में बढ़कर 320 तक पहुंच गई। हालांकि 2025 में यह संख्या घटकर 247 रही, लेकिन इसे स्थायी सुधार नहीं माना जा सकता। हादसों की कुल संख्या और मौतों के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि शहर की सड़कों पर खतरा लगातार बना हुआ है।

ब्लैक स्पॉट बने मौत के केंद्र
शहर के कई प्रमुख चौराहे और मार्ग ऐसे हैं, जहां हादसे बार-बार हो रहे हैं। बाणगंगा का लव कुश चौराहा, लसूडिया का देवास नाका, कनाडिया का बिचोली मर्दाना बायपास, आजाद नगर का तीन इमली क्षेत्र और रिंग रोड का आईटी पार्क जैसे स्थान अब ब्लैक स्पॉट के रूप में पहचाने जाने लगे हैं। इन जगहों पर सुरक्षा के विशेष इंतजामों की जरूरत महसूस की जा रही है।

हाल के हादसों ने बढ़ाई चिंता
हाल ही में खुड़ैल क्षेत्र में एक दर्दनाक हादसा हुआ, जहां बारात से लौट रही कार ट्रक में जा घुसी। इस दुर्घटना में चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए। वहीं तेजाजी नगर ब्रिज पर हुए एक अन्य हादसे में तेज रफ्तार कार डंपर से टकरा गई, जिसमें तीन लोगों की जान चली गई। इन घटनाओं ने एक बार फिर तेज रफ्तार और लापरवाही के खतरों को उजागर किया है।

दावे बहुत, असर कम
प्रशासन हर साल सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक सुधार के दावे करता है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका असर सीमित ही दिखाई देता है। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते वाहन, नियमों की अनदेखी, शराब पीकर वाहन चलाना और गलत दिशा में गाड़ी चलाना हादसों की मुख्य वजह हैं।

जरूरत ठोस कदमों की
इंदौर में सड़क हादसों को रोकने के लिए केवल अभियान नहीं, बल्कि सख्त और प्रभावी कार्रवाई की जरूरत है। जब तक ट्रैफिक नियमों का कड़ाई से पालन नहीं कराया जाएगा और बुनियादी सुविधाओं को दुरुस्त नहीं किया जाएगा, तब तक इन हादसों पर लगाम लगाना मुश्किल ही रहेगा।

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