ड्राइवर ने बात नहीं सुनी, तो फिल्मी अंदाज में अपना सिर उंसके सिर पर दे मारा!
चूरू/रतनगढ़। राजस्थान के नेशनल हाईवे-11 पर अनुशासन और रसूख के बीच की लकीर उस वक्त धुंधली हो गई, जब एक सरकारी रक्षक ही भक्षक की भूमिका में नजर आया। मामला रतनगढ़ के पास सूरजसुखी पेट्रोल पंप का है, जहां ड्यूटी पर तैनात परिवहन निरीक्षक सुरेश कुमार विश्नोई ने कानून सिखाने के बजाय ‘कुश्ती’ के दांव-पेच आजमा दिए।
मोबाइल के बदले मिला ‘खून’
खबरों के मुताबिक, सुजानगढ़ डीटीओ कार्यालय के इंस्पेक्टर सुरेश विश्नोई ने एक ट्रक को रोककर ड्राइवर से लाइसेंस मांगा। ड्राइवर ने शालीनता से जवाब दिया कि लाइसेंस मोबाइल में है, बस आप फोन दे दीजिए तो दिखा दूँ। लेकिन साहब को यह बात इतनी नागवार गुजरी कि उन्होंने आव देखा न ताव, फिल्मी अंदाज में अपना सिर ट्रक चालक के सिर पर दे मारा। टक्कर इतनी जोरदार थी कि ड्राइवर की आंख के पास से खून निकल पड़ा।

वीडियो का ‘पावर’ और सांसद का दखल
घटना का वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया पर बिजली की तरह दौड़ा, प्रशासन में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने मोर्चा संभाला। उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से इस ‘गुंडागर्दी’ पर सख्त एक्शन की मांग की और वीडियो शेयर कर सिस्टम को आईना दिखाया।
मुख्यालय अटैच, अब जयपुर में देंगे हाजिरी
वीडियो के सबूत और भारी जन-आक्रोश को देखते हुए परिवहन आयुक्त पुरुषोत्तम शर्मा ने कड़ा फैसला लिया। अनुशासनहीनता के आरोपी इंस्पेक्टर सुरेश विश्नोई को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। सस्पेंशन की अवधि के दौरान साहब का ठिकाना अब जयपुर मुख्यालय रहेगा।
क्या केवल निलंबन ही इंसाफ
इस घटना ने व्यवस्था पर कई चुभते हुए सवाल खड़े कर दिए हैं।
– अर्थव्यवस्था के सारथी पर हमला: जो ट्रक ड्राइवर दिन-रात जागकर देश की सप्लाई चेन को जिंदा रखते हैं, क्या उनके साथ ऐसा अमानवीय व्यवहार स्वीकार्य है?
– बर्खास्तगी की मांग : जनता और जानकारों का मानना है कि निलंबन तो महज एक ‘टेंपररी ब्रेक’ है। अगर जांच में दोष सिद्ध होता है, तो सेवा से बर्खास्तगी जैसे कठोर कदम उठाए जाने चाहिए ताकि भविष्य में कोई अधिकारी वर्दी की आड़ में रसूख न दिखाए।
– भ्रष्टाचार का दीमक : अक्सर हाईवे पर ड्राइवरों को बेवजह परेशान करने की शिकायतें आती हैं। क्या अब समय नहीं आ गया कि एक ऐसा पारदर्शी सिस्टम बने जहां कैमरा सिर्फ जनता पर नहीं, बल्कि चेकिंग कर रहे अधिकारियों पर भी नजर रखे?
> प्रशासन का काम सेवा करना है, भय पैदा करना नहीं। कानून का राज तभी कहलाएगा जब सड़क पर चलने वाला हर नागरिक खुद को सुरक्षित महसूस करे, चाहे सामने वर्दी वाला ही क्यों न खड़ा हो।
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