Private Schools की मनमानी, प्राइमरी शिक्षा पर भारी पड़ेंगी निजी पब्लिशर्स की महंगी किताबें!

एनसीईआरटी (NCERT) का कोर्स 5वीं से बाहर, अभिभावकों पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ!

भोपाल। निजी स्कूलों ने कक्षा 5वीं तक के सिलेबस से NCERT की किताबों को पूरी तरह हटा दिया है। शिक्षा विभाग की सख्ती के दावों के बीच स्कूलों ने निजी पब्लिशर्स की महंगी किताबों को प्राथमिकता दी है, जिससे शिक्षा अब और भी महंगी होने वाली है।

स्कूलों द्वारा जारी की गई नई सिलेबस लिस्ट के अनुसार, प्राइमरी कक्षाओं के लिए किताबों के दाम आसमान छू रहे हैं। जहाँ सरकारी नियमों के तहत सस्ती और मानक किताबें होनी चाहिए, वहीं निजी पब्लिशर्स की एक-एक किताब 600 रुपये से अधिक की बेची जा रही है।

नर्सरी और प्राइमरी में किताबों का अंबार

8 से 14 किताबों का बोझ

1 अप्रैल से शुरू होने वाले नए सत्र के लिए जारी सूची में छोटी कक्षाओं के बच्चों के लिए 8 से 14 तक किताबें अनिवार्य की गई हैं। नर्सरी जैसी छोटी कक्षाओं में भी 9 किताबें लगाई गई हैं, जिनकी कुल कीमत हजारों में पहुँच रही है। छठी कक्षा से ऊपर के छात्रों के लिए भी राहत कम ही है। कुल 19 किताबों के सेट में से केवल 6 किताबें ही एनसीईआरटी की रखी गई हैं, जबकि शेष 13 किताबें निजी प्रकाशकों की महंगी दरों पर आधारित हैं।

सीबीएसई स्कूलों की सबसे अधिक शिकायतें

भोपाल के लगभग 150 सीबीएसई स्कूलों में महंगी किताबों और यूनिफॉर्म को लेकर सबसे ज्यादा आक्रोश है। बढ़ती शिकायतों को देखते हुए जिला कलेक्टर ने मामले की गहन जांच के लिए एक विशेष टीम का गठन किया है। इस बारे में शिक्षा विभाग ने अपना पक्ष रखा।

जिला शिक्षा अधिकारी एनके अहिरवार के अनुसार, सभी स्कूलों से उनके द्वारा पढ़ाई जाने वाली किताबों की सूची मांगी गई है। स्कूलों के वास्तविक सिलेबस और विभाग को दी गई सूची का मिलान किया जाएगा, जिसके बाद नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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