MP की BJP राजनीति में बड़े बदलाव का इशारा दिल्ली से मिला!

कृषि कैबिनेट से कैलाश विजयवर्गीय और प्रह्लाद पटेल का नदारद रहना सवाल बना


भोपाल। MP की सियासत में इन दिनों ‘बड़वानी की दूरी’ और ‘दिल्ली की नजदीकी’ के गहरे अर्थ निकाले जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कृषि कैबिनेट की बैठक से दो दिग्गज मंत्रियों कैलाश विजयवर्गीय और प्रह्लाद पटेल की गैरमौजूदगी महज एक इत्तेफाक नहीं, बल्कि राज्य के सियासी समीकरणों में बड़े बदलाव की आहट मानी जा रही है।

​अमित शाह से मुलाकात, मिशन या विदाई की तैयारी? ​

इस पूरे घटनाक्रम की पटकथा शनिवार को दिल्ली में लिखी गई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सीएम मोहन यादव, कैलाश विजयवर्गीय और प्रह्लाद पटेल से अलग-अलग बंद कमरे में चर्चा की। ‘वन-टू-वन’ मीटिंग के ठीक बाद अहम कैबिनेट बैठक से इन दोनों कद्दावर नेताओं का किनारा करना इस बात की पुष्टि करता है कि दिल्ली में कुछ ऐसा तय हुआ है, जिसकी घोषणा होना अभी बाकी है।

मैदान में सक्रिय, पर कैबिनेट से दूर ​हैरानी की बात यह है कि दोनों मंत्री अपने निजी और सामाजिक कार्यक्रमों में पूरी तरह सक्रिय थे, लेकिन सरकारी बैठक के लिए उन्होंने समय नहीं निकाला :

​कैलाश विजयवर्गीय: जिस वक्त बड़वानी में कैबिनेट चल रही थी, विजयवर्गीय भगोरिया उत्सव के उल्लास में डूबे थे और बाद में त्रिपुरा के सीएम से मुलाकात कर रहे थे।

– ​प्रह्लाद पटेल: पटेल ने भोपाल में कार्यकर्ताओं के बीच समय बिताया और फिर विदिशा रवाना हो गए। ​उनकी यह सक्रियता दर्शाती है कि वे प्रदेश में तो हैं, लेकिन सरकार के सामूहिक मंचों से खुद को धीरे-धीरे पीछे खींच रहे हैं।

उनकी यह सक्रियता दर्शाती है कि वे प्रदेश में तो हैं, लेकिन सरकार के सामूहिक मंचों से खुद को धीरे-धीरे पीछे खींच रहे हैं।

कद का टकराव और दिल्ली वापसी के संकेत ​मध्य प्रदेश भाजपा में ‘सीनियर बनाम जूनियर’ की स्थिति छिपी नहीं है। प्रह्लाद पटेल केंद्र में कद्दावर मंत्री रह चुके हैं और कैलाश विजयवर्गीय राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी के सबसे बड़े रणनीतिकारों में शुमार हैं। ऐसे में मोहन यादव के नेतृत्व में काम करना इन दिग्गजों के लिए राजनीतिक रूप से असहज रहा है।

– ​राष्ट्रीय भूमिका : चर्चा है कि पार्टी इन दोनों नेताओं को फिर से राष्ट्रीय संगठन या आगामी बड़े राज्यों के चुनावों की कमान सौंप सकती है।

– ​मंत्रिमंडल विस्तार: इसी महीने होने वाले संभावित फेरबदल में कुछ बड़े नामों की विदाई और नए चेहरों की एंट्री हो सकती है।

​मोहन यादव के लिए क्या हैं इसके मायने ​

यदि विजयवर्गीय और पटेल राष्ट्रीय राजनीति में लौटते हैं, तो यह मुख्यमंत्री मोहन यादव के लिए राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने का सुनहरा मौका होगा। दिग्गजों की विदाई से सत्ता का केंद्र पूरी तरह सीएम हाउस की ओर शिफ्ट हो जाएगा, जिससे सरकार चलाने में किसी भी प्रकार के ‘पावर सेंटर’ का टकराव खत्म हो सकता है।

कुछ अनपेक्षित होने का इशारा

बड़वानी की दो खाली कुर्सियां इस बात का प्रमाण हैं कि एमपी भाजपा में सब कुछ सामान्य नहीं है। अमित शाह के दखल के बाद अब गेंद आलाकमान के पाले में है। क्या ये दिग्गज फिर से दिल्ली का रुख करेंगे या प्रदेश की राजनीति में ही नई भूमिका पाएंगे, इसका फैसला जल्द होने वाले मंत्रिमंडल विस्तार में साफ हो जाएगा।

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