छह अफसरों को नोटिस, पर राज्यपाल की व्यवस्था में लापरवाही के असल दोषी को क्यों बक्शा गया!
इंदौर। देश का सबसे स्वच्छ शहर इंदौर पिछले कुछ दिनों से कई तरह की नाकामियां झेल रहा है। पहले भागीरथपुरा का दूषित जल और अब रेसीडेंसी कोठी का खराब खाना। इन दोनों मामलों ने इंदौर की छवि को धूमिल कर दिया। भागीरथपुरा के दूषित पानी के बाद देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर को एक दाग और लग गया।
यहां ठहरे राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने गंदगी और खराब खाने से नाराज होकर रेसीडेंसी में खाना खाने से इनकार कर दिया। राज्यपाल के ओएसडी और एडीसी ने स्वयं आंखों से गंदगी देखी और राज्यपाल को रिपोर्ट की। लेकिन, प्रशासन ने सिर्फ ‘रतन सिक्योरिटीज’ का अनुबंध निरस्त किया, उस पर कोई कार्रवाई नहीं की, जो होना चाहिए!
सवाल उठ रहा है कि रतन अरोरा पर आखिर किसका वरदहस्त है! आखिर वह कौन सी ताकत है जिसने कलेक्टर को रतन अरोड़ा पर सख्त कार्रवाई करने से रोका है।
कलेक्टर शिवम वर्मा ने राज्यपाल की व्यवस्था में लगे 6 अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस दिए, पर रतन अरोरा की कंपनी पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं की। इससे लगता है कि क्या रतन अरोरा इतना प्रभावशाली व्यक्ति है जिस पर कार्रवाई से प्रशासन भी डर रहा है।
जानकारी के लिए यह संदर्भ जरूरी है कि रतन अरोरा शिवराज सरकार के समय कभी ताकतवर रहे दिलीप सूर्यवंशी का गुर्गा है और इंदौर रेसीडेंसी के अलावा इसके और भी कई सरकारी गेस्ट हाउस और अन्य जगह हाउस कीपिंग के ठेके हैं। इंदौर रेसीडेंसी के रतन सिक्योरिटी के कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें ढाई साल से वेतन नहीं मिला।

यह हुआ था पूरा मामला
महामहिम के ठहरने के लिए आरक्षित सुइट में गंदगी और रसोई घर में गंदगी का अंबार, बर्तनों और फर्श पर कॉकरोच और कीड़े रेंगते पाए गए। यहां तक कि किचन में गंदगी और दागदार बेडशीट से महामहिम नाराज हो गए और उन्होंने रेसीडेंसी कोठी में भोजन करने से ही इंकार कर दिया था।
प्रशासन ने हाउस कीपिंग का जिम्मा संभालने वाली रमन अरोरा की कंपनी रतन सिक्योरिटीज को नोटिस जारी कर, फिर एजेंसी का अनुबंध निरस्त कर दिया। पर, इतनी बड़ी लापरवाही पर उसके खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं कराया गया, जिसकी जरूरत है। क्योंकि, इस घटना ने इंदौर की स्वच्छता रैंकिंग और वीवीआईपी सुरक्षा मानकों पर भी खड़े सवाल खड़े किए हैं।
शुद्धता अभियान पर सवालिया निशान
प्रदेश सरकार शुद्धता और पारदर्शी प्रशासन के लिए कटिबद्ध है। किन्तु रमन अरोरा जैसे लोग सरकार के लिए चुनौती बने हुए हैं। इस गंभीर चूक और असावधानी का अपराध अक्षम्य है। पर इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने दोषी कंपनी और रमन अरोरा पर कार्रवाई क्यों नहीं की। आखिर वह कौन सा दबाव है, जिस कारण इंदौर प्रशासन ने रतन अरोड़ा की इस कंपनी पर कोई शख्स का कार्रवाई करते हुए सिर्फ उनका अनुबंध ही निरस्त किया है।
कई वीवीआईपी भी यहां खा चुके दूषित खाना
राज्यपाल की सुरक्षा और प्रोटोकॉल अफसरों ने समय रहते स्थिति को भांप लिया और राज्यपाल को इससे अवगत करा दिया। किन्तु प्रश्न उठ रहा है कि पूर्व में अनेक वीवीआईपी रेसीडेंसी में आते रहे हैं। क्या उन्हें भी इसी तरह का दूषित खाना परोसा जाता रहा है! क्या इस तरह की गंभीर चूक का सामना उन्हें भी करना पड़ा होगा।
अगर ऐसा हुआ है, तो इस असावधानी और गंभीर चूक के दोषी को अब सजा देने में कोताही क्यों की जा रही है। हाउसकीपिंग कंपनी का तर्क है कि उन्हें व्यवस्था संचालित करने के लिए काफी समय से भुगतान नहीं किया गया। पर, क्या यह जवाब इस गंभीर चूक का सही जवाब है?
यहां आपको मध्य प्रदेश के विभिन्न पहलुओं से जुड़ी राजनीति, अपराध, मौसम और स्थानीय घटनाओं की हर बड़ी और तेज़ जानकारी समय पर और सटीक रूप में मिलती है। भरोसेमंद खबरों के लिए हमारे साथ जुड़े रहें और NewsPointMP को फॉलो करें, ताकि आप हमेशा अपडेटेड रहें।
#MPNews #IndoreNews #NewspointMP #MPNewsUpdate