भारतीय मूल की नवनेथम नावी पिल्लै को मिला वर्ष 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार, रंगभेद के खिलाफ संघर्ष किया!
नई दिल्ली। नॉर्वेजियन नोबेल समिति ने दक्षिण अफ्रीका की प्रख्यात वकील और जज रह चुकीं भारतीय मूल की नवनेथम नावी पिल्लै को वर्ष 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार प्रदान करने की घोषणा की है। उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान शांति स्थापना और अंतरराष्ट्रीय कानून को मजबूत करने की दिशा में किए गए उनके असाधारण योगदान के लिए दिया जा रहा है। अपने करियर के दौरान वे दक्षिण अफ्रीका के उच्च न्यायालय में नियुक्त होने वाली पहली गैर-श्वेत महिला जज भी रही थीं।
रॉयटर्स समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, नोबेल समिति ने अपने बयान में कहा है कि उनके शुरुआती दौर के कार्यों से लेकर हमारे समय के सबसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय अदालती मुकदमों में एक न्यायाधीश के रूप में निभाई गई उनकी भूमिका तक, हर जगह एक स्पष्ट संदेश दिखाई देता है। उन्होंने अपने शुरुआती दिनों में नेल्सन मंडेला और रंगभेद नीति के खिलाफ आवाज उठाने वाले अन्य संघर्षकर्ताओं का डटकर बचाव किया था।
प्राइज मनी कितनी और सम्मान समारोह कहां
साहित्य, रसायन विज्ञान, भौतिकी और चिकित्सा के क्षेत्र के बाद इस सप्ताह की यह पांचवीं नोबेल घोषणा है। इससे पहले वर्ष 2025 में यह पुरस्कार वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना माचाडो ने जीता था। इस वर्ष शांति का नोबेल जीतने वाली नावी पिल्लै को पुरस्कार राशि के रूप में 1.2 करोड़ स्वीडिश क्रोना यानी भारतीय मुद्रा के अनुसार लगभग 11.66 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। उन्हें आगामी 10 दिसंबर को ओस्लो शहर में यह पुरस्कार आधिकारिक तौर पर सौंपा जाएगा।
भारतीय तमिल परिवार से ताल्लुक रखती हैं नावी पिल्लै
नावी पिल्लै का जन्म 23 दिसंबर 1941 को एक भारतीय तमिल परिवार में हुआ था। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के काले दौर के खिलाफ एक लंबी और कठिन लड़ाई लड़ी है। एक वकील के रूप में उन्होंने इस दमनकारी नीति के विरुद्ध खुलकर आवाज उठाई। नावी ने नेल्सन मंडेला सहित कई राजनीतिक बंदियों के मानवाधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी मोर्चे पर कड़ा संघर्ष किया था। इसके अलावा, वे वर्ष 2008 से 2014 तक संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त के पद पर भी अपनी सेवाएं दे चुकी हैं।

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