इथेनॉल के कारण फेस्टिवल सीजन में चीनी और गुड़ की कीमतों में भारी उछाल, गन्ने का उपयोग इथेनॉल बनाने में हुआ!

इंदौर। आगामी फेस्टिवल सीजन में आम उपभोक्ताओं को महंगाई की मार झेलनी पड़ेगी । उपभोक्ता बाजार में गुड़ और चीनी की कीमतों में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। चीनी और गुड़ की कीमतों में लगभग 40 से 60 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। रक्षाबंधन और जन्माष्टमी के साथ ही आनेवाले दिनों में दशहरा और दीपावली फेस्टिवल में चीनी और गुड़ की मांग बढ़ जाती हैं। जिससे कीमतों में और बढ़ोतरी से इनकार नहीं किया जा सकता हैं। वैसे सरकार चीनी की बढ़ती कीमतों से निपटने के लिए आयात पर भी विचार कर रही है।
कारोबार विशेषज्ञ बसंत पाल के मुताबिक, प्रदेश में उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों में इन दिनों भारी उछाल देखने को मिल रहा है। सामान्यतः गुड़ और चीनी की कीमतें बीते 9 से 10 सालों से सीमित उतार-चढ़ाव के बीच बनी हुई हैं । बीते दो सप्ताह में ही 45 से 55 रुपये प्रति किलो बिकने वाली चीनी के दाम 17 से 20 फीसदी तक बढ़कर 65 से 75 रुपए प्रति किलो हो गए हैं। वहीं गुड़ की कीमतों में भी भारी उछाल देखने को मिल रहा है और 50 से 60 रुपये प्रति किलो तक बिकने वाला गुड़ अब 70 से 80 रुपये और ब्रांडेड पैक गुड़ 120 से 150 रुपए किलो पर पहुंच गया हैं।

सरकार 10 लाख टन चीनी आयात के संकेत
फ़ेस्टिवल सीजन चीन और गुड़ की कीमतों में भारी वृद्धि से चिंतित सरकार 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात पर विचार कर रही हैं। इस स्थिति में कीमतों में कुछ गिरावट संभव है पर जिस तेजी से कीमतों में वृद्धि हुई है उसे देखते हुए भाव में बड़ी गिरावट की संभावना कम दिखाई दे रही है। इससे पहले सरकार वर्ष 2016-17 में भी चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी पर आयात की अनुमति दे चुकी है।

इथेनॉल बना आफत
सरकार के लिए इथेनॉल आफत बनता दिखाई दे रहा हैं। एक और उपभोक्ता पेट्रोल में ईंधन के रूप में इस्तेमाल होने वाले इथेनॉल से परेशान हैं वहीं इसके उत्पादन में इस वर्ष लगभग 30 लाख टन चीनी के उत्पादन जितना गन्ना, इथेनॉल उत्पादन में खपाने के समाचार हैं। विक्रेताओं का कहना है कि आगामी दिनों में बाजार में फेस्टिवल सीजन की मांग बढ़ेगी और इससे चीनी कीमतों में और तेजी आने की संभावना है। आयात के खबरों से न्यूयार्क मार्केट में चीनी के दाम में बढ़ोतरी की संभावना भी जताई जा रही है।

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