टीआरपी का नियम बदला, केंद्र और केबल नेटवर्क कंपनियों की कानूनी लड़ाई केरल हाईकोर्ट पहुंची

कोर्ट के अंतरिम आदेश को हटवाने के प्रयास में जुटा सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय !

नई दिल्ली। देश में टेलीविजन चैनलों की टीआरपी (रेटिंग) तय करने की व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार और केबल ऑपरेटरों के बीच छिड़ा विवाद अब कानूनी मोड़ ले चुका है। केंद्र सरकार की नई टीवी रेटिंग नीति-2026 के एक खास प्रावधान के खिलाफ ऑल इंडिया डिजिटल केबल फेडरेशन (एआईडीसीएफ) और डेन नेटवर्क्स ने केरल हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
इस नीति के तहत सरकार ने नियम बनाया है कि टेलीविजन ऑन करते ही स्क्रीन या लैंडिंग पेज पर अपने आप चलने वाले चैनल की व्यूअरशिप को टीआरपी की गिनती में शामिल नहीं किया जाएगा। फिलहाल, हाईकोर्ट ने सरकार के इस नियम पर अंतरिम रोक लगा रखी है, जिसे हटवाने के लिए अब सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने अदालत में अपनी दलीलें पेश की हैं।

दर्शक मर्जी से चैनल नहीं चुनते
केंद्र सरकार ने अदालत में हलफनामा दायर कर इस रोक को हटाने की मांग की है। सरकार का तर्क है कि कई बार दर्शक अपनी मर्जी से कोई चैनल नहीं चुनते, बल्कि टीवी चालू होते ही सामने आने की वजह से वह चैनल चलता रहता है। इससे उस चैनल की व्यूअरशिप कृत्रिम रूप से बढ़ जाती है और टीआरपी के आंकड़े जमीनी हकीकत से अलग हो जाते हैं। सरकार का मानना है कि रेटिंग का निर्धारण पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी होना चाहिए, जो सिर्फ दर्शकों की वास्तविक पसंद पर आधारित हो। इसी वजह से रेटिंग प्रणाली में सुधार के लिए यह कदम उठाया गया है।

लैंडिंग पेज के व्यावसायिक उपयोग पर रोक नहीं
दूसरी तरफ, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि नई नीति में लैंडिंग पेज के व्यावसायिक उपयोग पर कोई पाबंदी नहीं लगाई गई है। चैनल और केबल कंपनियां अपनी ब्रांडिंग और प्रचार के लिए इसका इस्तेमाल पहले की तरह जारी रख सकती हैं, बशर्ते इस माध्यम से मिलने वाले दर्शकों की संख्या को टीआरपी में न जोड़ा जाए। मंत्रालय के अनुसार, इस नीति को अंतिम रूप देने से पहले ब्रॉडकास्टर्स, केबल ऑपरेटरों और रेटिंग एजेंसियों सहित सभी संबंधित पक्षों के साथ गहन विचार-विमर्श किया गया था। चूंकि चैनलों की कमाई, विज्ञापन और बाजार में उनकी साख पूरी तरह टीआरपी पर निर्भर करती है, इसलिए इस व्यवस्था का पारदर्शी होना बेहद जरूरी है। इस मामले में केरल हाईकोर्ट का आगामी फैसला भारतीय टेलीविजन उद्योग और रेटिंग के भविष्य की दिशा तय करने में बड़ा उलटफेर कर सकता है।

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