तापमान का महा-संकट, अल नीनो तोड़ेगा अब तक के सभी रिकॉर्ड, संयुक्त राष्ट्र ने दी भीषण गर्मी की चेतावनी !


नई दिल्ली। वैश्विक पर्यावरण में एक बड़ा संकट दस्तक दे रहा है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने अल नीनो के प्रभाव को लेकर पूरी दुनिया को सचेत किया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि पहले से ही लगातार गर्म हो रही हमारी धरती पर अल नीनो का आगमन आग में घी डालने जैसा काम करेगा। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्होंने सभी देशों से तुरंत सुरक्षात्मक और एहतियाती कदम उठाने का आग्रह किया है।

आगामी वर्षों में दिखेगा प्रकृति का रौद्र रूप
मौसम विशेषज्ञों के आकलनों के अनुसार, वर्ष 2026 और 2027 के दौरान पूरी दुनिया को मौसम का बेहद विनाशकारी रूप झेलना पड़ सकता है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस बार आकार लेने वाला अल नीनो इतिहास का सबसे प्रचंड और शक्तिशाली रूप अख्तियार कर सकता है। इस प्राकृतिक बदलाव के कारण वैश्विक स्तर पर गर्मी के पुराने सारे रिकॉर्ड ध्वस्त हो जाएंगे, जिसका सीधा और घातक प्रभाव पीने के पानी की उपलब्धता तथा कृषि व्यवस्था पर पड़ेगा।

समुद्र की सतह में अप्रत्याशित गर्माहट की आशंका
यूरोपियन सेंटर फॉर मीडियम-रेंज वेदर फोरकास्ट की एक रिपोर्ट इस बात की गवाही दे रही है। इस संस्था के अनुसार, अल नीनो के प्रभाव से वर्ष 2026 के दिसंबर महीने तक मध्य भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागरीय क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से 5.4 डिग्री फारेनहाइट यानी 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है। कुछ अन्य अध्ययनों में तो इसके 7.2 डिग्री फारेनहाइट यानी 4 डिग्री सेल्सियस तक पहुँचने की डरावनी आशंका जताई गई है।
यदि यह आकलन सच साबित होता है, तो इस वर्ष की गर्मी पूर्व के सभी पैमानों को पार कर जाएगी। यह स्थिति वर्ष 2015-2016 और वर्ष 1997-1998 में आए विनाशकारी अल नीनो से भी कहीं अधिक खतरनाक होगी। उन बीते वर्षों में नीनो 3.4 सूचकांक के तहत तापमान सामान्य से 4.1 डिग्री फारेनहाइट यानी 2.3 डिग्री सेल्सियस ही ऊपर गया था।

मौसम वैज्ञानिकों ने जताई भीषणतम बदलाव की चिंता
मौसम के जानकारों और वैश्विक विश्लेषकों का भी यही मानना है कि वर्तमान में जितने भी आकलन सामने आ रहे हैं, वे सभी तापमान में 3 डिग्री सेल्सियस से अधिक की बढ़ोतरी दिखा रहे हैं। कुछ गणनाएँ तो 4 डिग्री सेल्सियस को भी पार कर रही हैं, जो इस बात का साफ संकेत है कि मानव जाति अब तक के सबसे भीषण अल नीनो का सामना करने जा रही है।

वैश्विक मौसम चक्र में उथल-पुथल और प्रशासनिक मुस्तैदी की आवश्यकता
यह मौसमी उलटफेर प्रशांत महासागर में हर 2 से 7 वर्षों के अंतराल पर होने वाले एक प्राकृतिक चक्र का हिस्सा है। इसके सक्रिय होने से मध्य और पूर्वी प्रशांत क्षेत्र में समुद्री पानी गर्म हो जाता है, जिससे हवाओं की रफ्तार धीमी पड़ती है और पूरी दुनिया में वर्षा तथा तापमान का संतुलन बिगड़ जाता है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने आगाह किया है कि इस परिस्थिति के सितंबर से पहले विकसित होने की संभावना 80 प्रतिशत और नवंबर से पहले 90 प्रतिशत तक है। संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने कहा है कि 90 प्रतिशत सटीकता के साथ यह संकट आने वाले महीनों में दस्तक दे देगा। उन्होंने दुनिया को इसे एक अंतिम चेतावनी की तरह लेने को कहा है, क्योंकि इस मौसमी थपेड़े का असर बहुत व्यापक होगा और यह भौगोलिक सीमाओं को लांघकर हर देश को प्रभावित करेगा।

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