‘हनी ट्रैप’ की जांच में नया खुलासा, सागर की युवती भी रेशू के नेटवर्क से जुड़ी मिली

सागर। बहुचर्चित हनी ट्रैप 2.0 मामले की जांच में लगातार नए तथ्य सामने आ रहे हैं। इंदौर अपराध शाखा की विशेष टीम ने पिछले 3 दिनों तक सागर में रहकर विभिन्न पहलुओं की जांच की। इस दौरान पता चला कि सागर के कोतवाली थाना क्षेत्र की एक युवती भी मुख्य आरोपी रेशू चौधरी के ब्लैकमेलिंग नेटवर्क से जुड़ी हुई थी।

सूत्रों के अनुसार रेशू ने युवती को लोगों को जाल में फंसाने और आपत्तिजनक वीडियो तैयार करने का तरीका भी सिखाया था। हालांकि प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि युवती द्वारा बनाए गए वीडियो का अभी तक किसी प्रकार से उपयोग नहीं हुआ, इसलिए उससे सीमित पूछताछ की गई है। अपराध शाखा रेशू के मोबाइल संपर्क विवरण के आधार पर युवती तक पहुंची। चर्चा यह भी है कि हाल के दिनों में जिस युवती का आपत्तिजनक वीडियो प्रसारित हुआ था, वह वही युवती हो सकती है।

मकरोनिया स्थित घर पहुंची जांच टीम
जांच दल में एक उप पुलिस अधीक्षक और 2 निरीक्षक स्तर के अधिकारी शामिल थे। स्थानीय सहयोग के लिए एक महिला निरीक्षक, एक थाना प्रभारी और एक प्रधान आरक्षक को भी टीम के साथ लगाया गया था टीम सबसे पहले मकरोनिया थाना क्षेत्र स्थित रेशू के घर पहुंची। यहां उसके परिजनों से आय के स्रोत, महंगे चार पहिया वाहनों और मकान से जुड़े दस्तावेजों के संबंध में जानकारी ली गई। जांच के दौरान यह जानकारी भी सामने आई कि रेशू का छोटा भाई करीब 3 वर्ष पहले एक ऑनलाइन धोखाधड़ी प्रकरण में पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया जा चुका है।

राजनीतिक और प्रभावशाली संपर्कों की भी पड़ताल
अपराध शाखा उन राजनीतिक और गैर-राजनीतिक संपर्कों की भी जांच कर रही है, जिनके सहारे रेशू भोपाल से लेकर दिल्ली तक प्रभाव बढ़ाने का प्रयास कर रही थी। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि क्या उसने बुंदेलखंड या सागर क्षेत्र में किसी व्यापारी, जनप्रतिनिधि अथवा अन्य प्रभावशाली व्यक्ति को ब्लैकमेलिंग का शिकार बनाया था। जांच के दौरान हाल में प्रसारित एक आपत्तिजनक वीडियो के संबंध में एक युवक से भी पूछताछ की गई। युवक ने वीडियो में अपनी मौजूदगी से इनकार किया है। इसके अलावा बहुचर्चित हनी ट्रैप प्रकरण की मुख्य आरोपी श्वेता जैन से जुड़े 7 से 8 वर्ष पुराने वीडियो के संबंध में भी कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाई गई हैं।

स्थानीय खुफिया व्यवस्था पर उठे सवाल
मामले में स्थानीय पुलिस की सूचना व्यवस्था भी सवालों के घेरे में आ गई है। सागर पुलिस अधीक्षक ने इस बात पर नाराजगी जताई है कि इंदौर पुलिस की टीम सागर पहुंची, कार्रवाई कर रेशू को गिरफ्तार कर ले गई, लेकिन स्थानीय स्तर पर इसकी जानकारी समय पर नहीं मिल सकी। फिलहाल रेशू के परिजनों के साथ-साथ पुलिस विभाग में कार्यरत उसके एक भाई की गतिविधियों पर भी नजर रखी जा रही है।

शराब कारोबारी की शिकायत से खुला मामला
इस पूरे मामले का खुलासा इंदौर के शराब कारोबारी चिंटू ठाकुर की शिकायत के बाद हुआ था। शिकायत के आधार पर इंदौर अपराध शाखा ने ब्लैकमेलिंग और अवैध वसूली से संबंधित धाराओं में प्रकरण दर्ज किया। इसके बाद श्वेता विजय जैन, अलका सहित 7 लोगों को गिरफ्तार किया गया। बाद में सागर के मकरोनिया स्थित घर से रेशू चौधरी को भी गिरफ्तार किया गया।

कई वीआईपी के आपत्तिजनक वीडियो मिले
पुलिस रिमांड के दौरान पूछताछ में यह चर्चा सामने आई है कि रेशू के पास कई प्रभावशाली व्यक्तियों, अधिकारियों और अन्य लोगों से संबंधित आपत्तिजनक वीडियो तथा बातचीत के रिकॉर्ड मिले हैं। सामाजिक माध्यमों पर उसके कुछ राजनेताओं और मंत्रियों के साथ तस्वीरें भी सामने आई हैं। हालांकि इन तस्वीरों की सत्यता की पुष्टि नहीं हुई है। अब तक किसी भी राजनीतिक व्यक्ति की इस मामले में संलिप्तता अथवा पीड़ित के रूप में आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

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