घर के काम को लेकर तलाक नहीं, सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

घर के काम को लेकर तलाक नहीं, सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

पत्नी नौकरानी नहीं, जीवनसाथी, पति को भी घरेलू जिम्मेदारियों में भागीदारी की नसीहत!

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एक वैवाहिक विवाद की सुनवाई के दौरान अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि घरेलू कामकाज को लेकर लगाए गए आरोप क्रूरता की श्रेणी में नहीं आते। अदालत ने स्पष्ट किया कि बदलते समय में पति-पत्नी दोनों को घर की जिम्मेदारियां साझा करनी चाहिए। सुनवाई के दौरान जस्टिस संदीप मेहता ने कहा कि शादी किसी नौकरानी से नहीं, बल्कि जीवनसाथी से की जाती है। ऐसे में घर के काम को लेकर विवाद को क्रूरता का आधार नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि आज के दौर में पति को भी खाना बनाने, कपड़े धोने जैसे कामों में सहयोग करना चाहिए।

मामले की पृष्ठभूमि यह मामला एक दंपति से जुड़ा है, जिनकी शादी वर्ष 2017 में हुई थी और उनका एक बेटा है। पति सरकारी स्कूल में शिक्षक है, जबकि पत्नी कॉलेज में लेक्चरर है। पति ने आरोप लगाया कि शादी के कुछ समय बाद ही पत्नी का व्यवहार बदल गया और उसने उसके व परिवार के साथ ठीक व्यवहार नहीं किया। पति के अनुसार, पत्नी घर के काम करने से इनकार करती थी और परिवार के साथ सहयोग नहीं करती थी, जिसके आधार पर उसने तलाक की मांग की।

पत्नी का पक्ष पत्नी ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वह बच्चे के जन्म के समय अपने मायके परिवार की सहमति से गई थी। उसने यह भी कहा कि ससुराल पक्ष की ओर से पैसों और सोने की मांग की गई तथा उस पर अपनी सैलरी देने का दबाव बनाया गया।

निचली अदालत से सुप्रीम कोर्ट तक फैमिली कोर्ट ने पति के पक्ष में फैसला देते हुए तलाक की मंजूरी दे दी थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस निर्णय को पलट दिया। इसके बाद पति ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल दोनों पक्षों को अगली तारीख पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं। इससे पहले सुलह के प्रयास भी किए गए थे, जो सफल नहीं हो सके।

अदालत का संदेश अदालत की टिप्पणी से यह साफ संकेत गया कि वैवाहिक संबंधों में बराबरी और साझेदारी जरूरी है। घरेलू जिम्मेदारियों को लेकर एकतरफा अपेक्षाएं अब स्वीकार्य नहीं हैं।

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