सरकार ने माना कि भागीरथपुरा क्षेत्र में 1997 की पुरानी पाइप लाइन, इनमें कुछ क्षतिग्रस्त नई दिल्ली। भागीरथपुरा में जल प्रदूषण की घटना में 30 से ज्यादा लोगों की मौत पर केंद्र सरकार ने गंभीरता से संज्ञान लिया है। सरकार ने ‘अमृत’ और ‘अमृत 2.0′ योजनाओं के तहत राज्यों को वित्तीय और तकनीकी सहायता दी जा रही है।

इनमें पुरानी पाइप लाइनों की पहचान कर उन्हें अमृत 2.0 में शामिल किया गया है। जल आपूर्ति परियोजनाओं के चार पैकेज की निविदाएं जारी की गई। सोमवार को राज्यसभा में बताया गया कि केंद्र ने इंदौर के भागीरथपुरा में जल प्रदूषण की घटना का संज्ञान लिया और अमृत तथा अमृत 2.0 जैसी वित्तीय एवं तकनीकी सहायता योजनाओं के माध्यम से राज्यों की मदद की जा रही है।
केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के राज्य मंत्री तोखन साहू ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में 1997 की पुरानी पाइपलाइन हैं, जिनमें से कुछ क्षतिग्रस्त हैं। इसलिए नगर प्रशासन ने पाइप लाइन के पुराने हिस्सों की पहचान की और उन्हें अमृत 2.0 योजना में शामिल किया है।
भागीरथपुरा में दिसंबर से दस्त और उल्टी से कई लोगों की मौत हो चुकी। इंदौर के लिए जल आपूर्ति परियोजनाओं की निविदाएं जारी मंत्री ने कहा कि इंदौर नगर निगम ने अमृत 2.0 के तहत इंदौर शहर के लिए जल आपूर्ति परियोजनाओं के चार पैकेज के लिए निविदाएं जारी की, जिनमें से पैकेज-1 का क्रियान्वयन शुरू हो चुका। शेष तीन पैकेज अनुमोदन के चरण में हैं।
यह परियोजना संपूर्ण जल आपूर्ति श्रृंखला को कवर करती है। इसमें मौजूदा जल आपूर्ति प्रणाली का व्यापक नवीनीकरण, संवर्धन और आधुनिकीकरण शामिल है। उन्होंने कहा कि जल आपूर्ति राज्य का विषय है और केंद्र सरकार परामर्श एवं अवसंरचना निधि के माध्यम से राज्यों के प्रयासों में सहयोग करती है। अभी तक 14,181 रिसाव का पता लगा तोखन साहू ने कहा कि राज्य सरकार ने सूचित किया है कि जल को दूषित होने से बचाने के लिए शहरी स्थानीय निकायों को मानक संचालन प्रक्रियाएं (एसओपी) जारी की गई हैं।
अब तक लगभग 14,181 रिसाव का पता लगा है, जिनमें से 12,634 की मरम्मत कर दी गई है। राज्य में 3,298 ओवरहेड टैंक में से 3,109 की सफाई की जा चुकी है। अपने लिखित जवाब में मंत्री ने कहा कि 80,976 नमूनों में से पानी के 656 नमूने दूषित पाए गए। जबकि, प्रदूषण पाए जाने वाले 588 बिंदुओं पर कार्रवाई की गई।