40 लाख की वसूली के लिए 3.6 करोड़ की संपत्ति बेच दी, बचे पैसे भी नहीं लौटाए, 35 साल पुराने मामले को सुप्रीम कोर्ट ने ख़त्म किया!

नई दिल्ली। बैंक से लिए गए ऋण की वसूली के लिए संपत्ति की नीलामी की गई, लेकिन बैंक ने बकाया रकम से कई गुना अधिक राशि मिलने के बावजूद बची हुई रकम संपत्ति मालिकों के कानूनी वारिसों को वापस नहीं की। करीब 35 साल पुराने इस मामले में अब सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक प्रकरण को खत्म कर दिया है। साथ ही अदालत यह सुनिश्चित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है कि नीलामी से मिली अतिरिक्त रकम संबंधित कानूनी वारिसों तक पहुंचाई जाए। मामले के 3 आरोपियों में से 2 की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है, जबकि एक आरोपी ही जीवित है।

बैंक ने 3.6 करोड़ में बेच दी संपत्तियां
मामला बैंक से लिए गए करीब 50 लाख रुपये के ऋण की वसूली से जुड़ा है। आरोप है कि बैंक के एक तत्कालीन शाखा प्रबंधक समेत 3 लोगों ने ऋण से संबंधित अनियमितताएं की थीं। शाखा प्रबंधक पर आरोप था कि उन्होंने 13.5 लाख रुपये और 10 लाख रुपये के ऋण मंजूर किए, लेकिन इन रकमों का खुद इस्तेमाल कर लिया। शिकायत के बाद प्राथमिकी दर्ज हुई और लंबे समय तक मामला चलता रहा।
बैंक ने वर्ष 2010 में ऋण की वसूली के लिए संपत्तियों को बेचने की प्रक्रिया शुरू की। एक आरोपी की संपत्ति की नीलामी से बैंक को करीब 1.2 करोड़ रुपये मिले। इसमें से सिर्फ 16.4 लाख रुपये ऋण और उस पर लगे ब्याज की भरपाई में इस्तेमाल किए गए। इसके बाद दूसरे आरोपी की संपत्ति बेचकर बैंक को करीब 2.8 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। इसमें से लगभग 40 लाख रुपये की ऋण देनदारी चुकाई गई।

बकाया चुकाने के बाद बचे करोड़ों
इस तरह दोनों संपत्तियों की बिक्री से बैंक को करीब 4 करोड़ रुपये मिले, जबकि ऋण की देनदारी इससे काफी कम थी। ऋण और ब्याज की रकम निकालने के बाद बची राशि संपत्तियों के मालिकों या उनके कानूनी वारिसों को लौटाई जानी थी। आरोप है कि ऐसा नहीं किया गया और अतिरिक्त रकम बैंक के पास ही बनी रही।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सरकारी गवाहों के बयानों से भी यह बात सामने आई कि ऋण खाते में आवश्यक समायोजन किए जाने के बाद नीलामी से मिली अतिरिक्त रकम अब भी बैंक के पास मौजूद है। अदालत ने इस स्थिति पर हैरानी जताई कि कानूनी वारिसों का पता लगाने और उन्हें उनकी रकम लौटाने की कोशिश तक नहीं की गई।

जीवित आरोपी को राहत
न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए जीवित बचे आरोपी को राहत दी। अदालत ने आपराधिक मामले को आगे चलाने का आधार नहीं पाया और इसे मनगढ़ंत बताते हुए प्रकरण का निपटारा कर दिया। हालांकि, अदालत ने यह भी साफ किया कि संपत्तियों की नीलामी से मिली अतिरिक्त रकम का मुद्दा अभी खत्म नहीं हुआ है। पीठ ने कहा कि यह स्वीकार किया जा चुका है कि संपत्तियों की नीलामी पूरी हो गई थी और बैंक को उसका पूरा बकाया मिल गया था।
ऐसे में अतिरिक्त रकम पर कानूनी वारिसों का अधिकार बनता है और बैंक को उस रकम के संबंध में स्थिति स्पष्ट करनी होगी। सुप्रीम कोर्ट ने इंडियन बैंक की अन्ना नगर शाखा के प्रबंधक को नीलामी से प्राप्त रकम के इस्तेमाल से जुड़े रिकॉर्ड अदालत में पेश करने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को तय की है।

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