इंदौर। शहर के बायपास क्षेत्र में क्रेन के सहारे लगभग 150 फीट की ऊंचाई पर संचालित कथित ‘ऊबुद हवाई रेस्टोरेंट’ अब कानूनी विवादों में घिर गया है। इस अनोखी लेकिन संभावित रूप से जोखिमपूर्ण गतिविधि को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए डिविजन बेंच ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए हैं और जवाब तलब किया है।
बिना वैधानिक अनुमति संचालन का आरोप
यह जनहित याचिका अधिवक्ता चर्चित शास्त्री द्वारा दायर की गई है। सुनवाई के दौरान नगर निगम की ओर से अदालत को बताया गया कि संबंधित रेस्टोरेंट को किसी प्रकार की वैधानिक अनुमति प्रदान नहीं की गई है। निगम ने यह भी जानकारी दी कि 13 नवंबर 2025 को संचालकों को नोटिस जारी किया गया था, जिसमें संचालन रोकने या आवश्यक स्वीकृतियां प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद गतिविधियां जारी रहने का आरोप लगाया गया है।

मौत का झूला’ करार
याचिका में कहा गया है कि इस रेस्टोरेंट में एक बार में 30 से अधिक लोगों को क्रेन के माध्यम से लगभग 150 फीट ऊपर ले जाकर भोजन परोसा जाता है। इसमें शराब और मांसाहार भी परोसे जाने का उल्लेख है। याचिकाकर्ता ने इसे ‘मौत का झूला’ बताते हुए अदालत का ध्यान इस ओर आकर्षित किया कि यदि तकनीकी खराबी, यांत्रिक विफलता या मौसम संबंधी प्रतिकूल स्थिति उत्पन्न होती है तो गंभीर हादसा हो सकता है।
किन विभागों से अनुमति आवश्यक, इसकी भी जांच
याचिका में यह भी सवाल उठाया गया है कि क्या अग्नि सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, संरचनात्मक स्थिरता, बीमा कवरेज और आपातकालीन निकासी (इवैक्यूएशन) जैसी अनिवार्य व्यवस्थाओं का परीक्षण किया गया है या नहीं। इतनी ऊंचाई पर संचालित व्यावसायिक गतिविधि के लिए किन-किन विभागों से अनुमति आवश्यक है, यह भी जांच का विषय बना हुआ है।
प्रशासनिक निगरानी पर प्रश्न
बायपास जैसे व्यस्त क्षेत्र में खुलेआम इस तरह का संचालन होने से प्रशासनिक निगरानी और सुरक्षा मानकों पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। याचिका में यह तर्क दिया गया कि यदि बिना अनुमति इस प्रकार का आयोजन संचालित हो रहा है तो यह न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा के साथ भी खिलवाड़ है।
10 मार्च को अगली सुनवाई
खंडपीठ ने दोनों पक्षों को विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 10 मार्च को निर्धारित की गई है। तब तक यह स्पष्ट होगा कि संबंधित संचालकों ने आवश्यक अनुमतियां ली हैं या नहीं, और प्रशासन इस पूरे प्रकरण में क्या रुख अपनाता है। फिलहाल, यह मामला केवल एक अनोखे रेस्टोरेंट की अवधारणा का नहीं, बल्कि शहरी क्षेत्रों में रोमांच के नाम पर सुरक्षा मानकों से समझौते के आरोपों का बन गया है। हाईकोर्ट की आगामी सुनवाई पर अब सभी की नजरें टिकी हैं
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