हजारों करोड़ बजट, फिर भी MP के स्कूल बेहाल, 6000 भवन जर्जर, 3500 में शौचालय नहीं

भोपाल। MP में स्कूली शिक्षा का बजट लगातार बढ़ रहा है, लेकिन जमीनी हालात अब भी चिंताजनक बने हुए हैं। विधानसभा में सरकार द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों से स्पष्ट है कि बड़ी संख्या में सरकारी स्कूल आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। वर्ष 2010-11 से 2024-25 के बीच शिक्षा बजट में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

राज्य शिक्षा केंद्र का खर्च 364 करोड़ रुपये से बढ़कर 6,485 करोड़ रुपये हो गया है। वहीं, स्कूल शिक्षा विभाग का बजट 6,203 करोड़ से बढ़कर 32,059 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। सरकार का कहना है कि बजट में वृद्धि शिक्षकों के वेतन-भत्तों में बढ़ोतरी, छठे और सातवें वेतनमान, महंगाई भत्ते, सांदीपनि विद्यालय योजना, ई-स्कूटी वितरण, विद्यार्थियों को नि:शुल्क गणवेश, आरटीई प्रतिपूर्ति और स्कूलों के रखरखाव जैसे मदों के कारण हुई है।

6000 स्कूल भवन खस्ताहाल

बजट बढ़ने के बावजूद प्रदेश में कक्षा 1 से 8 तक के लगभग 6,000 स्कूलों के भवन जर्जर स्थिति में हैं। कई स्थानों पर इमारतें इतनी खराब हो चुकी हैं कि वहां नियमित रूप से कक्षाएं संचालित करना कठिन हो गया है। यू-डाइस (UDISE) के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में 7,122 शासकीय हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूल संचालित हैं।

विभाग ने आधिकारिक तौर पर जर्जर भवनों की संख्या शून्य बताई है, हालांकि यह स्वीकार किया है कि कुछ कमरों की हालत खराब होने के कारण वहां पढ़ाई नहीं कराई जा रही है।

शौचालय की कमी बनी बड़ी समस्या

प्राथमिक और माध्यमिक स्तर के लगभग 3,500 स्कूलों में अब भी शौचालय की सुविधा उपलब्ध नहीं है। इनमें 1,725 बालकों और 1,785 बालिकाओं के स्कूल शामिल हैं। हाई और हायर सेकेंडरी स्तर पर भी 75 स्कूलों में लड़कों तथा 43 स्कूलों में लड़कियों के लिए शौचालय नहीं हैं। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में यह स्थिति अधिक गंभीर बताई जा रही है।

20 से कम छात्र वाले हजारों स्कूल

प्रदेश में ‘एक परिसर-एक शाला’ योजना के तहत 22,973 परिसर बनाए गए और 49,477 स्कूलों का विलय किया गया। इसके बावजूद 11,889 स्कूल ऐसे हैं जहां 20 से भी कम विद्यार्थी नामांकित हैं। इन स्कूलों में कुल 1,48,817 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं और 23,877 शिक्षक पदस्थ हैं।

प्राथमिक स्तर पर ऐसे स्कूलों की संख्या अधिक है। कुछ हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी विद्यालयों में भी विद्यार्थियों की संख्या 100 से कम है। इसके अतिरिक्त, जनजातीय कार्य विभाग के 3,773 स्कूलों में भी 20 से कम नामांकन दर्ज है।

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