भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक 2025: भारत ने लगाई 5 अंकों की छलांग, 91वें स्थान पर पहुंचा

पेरिस: दुनिया भर में सरकारी कामकाज की पारदर्शिता और ईमानदारी को मापने वाली संस्था ‘ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल’ ने अपनी ताज़ा रिपोर्ट जारी कर दी है। करप्शन परसेप्शन इंडेक्स (CPI) 2025 के अनुसार, भारत ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी लड़ाई में मजबूती दिखाई है। कुल 182 देशों की इस फेहरिस्त में भारत अब 91वें पायदान पर आ गया है, जो पिछले साल की तुलना में 5 स्थानों का सुधार दर्शाता है। भारत का नया स्कोर अब 39 हो गया है।

कैसे मापा जाता है यह पैमाना?
​यह सूचकांक शून्य से सौ के पैमाने पर काम करता है। जहाँ 0 का अर्थ सबसे अधिक भ्रष्ट व्यवस्था है, वहीं 100 का अर्थ पूरी तरह पारदर्शी शासन माना जाता है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में सरकारी सेवाओं का डिजिटलीकरण, प्रशासनिक सुधारों की गति और जनता में अधिकारों के प्रति सजगता ने इस रैंकिंग को सुधारने में अहम भूमिका निभाई है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि विकसित देशों की कतार में आने के लिए अभी और कड़े बदलावों की दरकार है।

​दुनिया और पड़ोसियों का हाल
​इस साल की रिपोर्ट में कई विकसित देशों के ग्राफ में गिरावट देखी गई है:
​अमेरिका और ब्रिटेन: अमेरिका खिसककर 29वें और ब्रिटेन 20वें स्थान पर आ गया है।
​एशियाई स्थिति: भूटान (18वीं रैंक) दक्षिण एशिया में सबसे बेहतर स्थिति में है। चीन 73वें और नेपाल 76वें स्थान पर है।


पड़ोसी देशों की चुनौती: पाकिस्तान (136वां), श्रीलंका (107वां) और म्यांमार-अफगानिस्तान (169वां) अभी भी भ्रष्टाचार की गंभीर चुनौतियों से जूझ रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि मालदीव भी भारत के साथ 91वें स्थान पर बना हुआ है।

​शीर्ष पर कौन ?
​हमेशा की तरह नॉर्डिक देशों ने अपना दबदबा बनाए रखा है। डेनमार्क 89 के स्कोर के साथ दुनिया का सबसे ईमानदार देश बना हुआ है। इसके बाद फिनलैंड, सिंगापुर, न्यूजीलैंड और नॉर्वे का नंबर आता है।

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