इंदौर। MP में घरेलू, व्यावसायिक और कृषि उपभोक्ताओं के लिए बिजली महंगी होने की आशंका बढ़ गई है। मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग के समक्ष प्रदेश की तीनों वितरण कंपनियों द्वारा दाखिल की गई दर वृद्धि याचिकाओं पर सुनवाई की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। आयोग अब नए वित्त वर्ष से पहले अपना फैसला सुनाएगा। यदि कंपनियों की मांग स्वीकार होती है तो 1 April से बिजली दरों में 10 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि लागू हो सकती है।

6 हजार करोड़ से ज्यादा घाटे का हवाला
प्रदेश में कार्यरत तीनों वितरण कंपनियां पूर्व क्षेत्र (जबलपुर), मध्य क्षेत्र (भोपाल) और पश्चिम क्षेत्र (इंदौर) ने दर संशोधन के लिए अलग-अलग याचिकाएं दायर की थीं। इनके साथ ही MP पॉवर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड ने भी वित्तीय घाटे का हवाला देते हुए दर बढ़ाने का प्रस्ताव रखा। कंपनियों का दावा है कि उन पर 6 हजार करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय दबाव है, जिसे संतुलित करने के लिए औसतन 10.19% दर वृद्धि जरूरी है।आयोग ने हाल ही में सभी पक्षों की दलीलें और उपभोक्ताओं की आपत्तियां सुनने के बाद प्रक्रिया पूरी कर ली है।
घरेलू उपभोक्ताओं पर सीधा असर
यदि प्रस्तावित वृद्धि लागू होती है तो घरेलू उपभोक्ताओं के मासिक बिल में सीधी बढ़ोतरी होगी। जिन उपभोक्ताओं का वर्तमान बिल 1400 से 2800 रुपये के बीच आता है, उनके बिल में औसतन 100 रुपये या उससे अधिक की वृद्धि हो सकती है। ज्यादा खपत वाले परिवारों पर यह असर 300 से 400 रुपये तक भी पहुंच सकता है।
व्यावसायिक प्रतिष्ठान, छोटे उद्योग, हाईटेंशन उपभोक्ता और सिंचाई कनेक्शन भी दर वृद्धि की जद में आएंगे। ऐसे में बाजार और कृषि लागत पर भी इसका प्रभाव पड़ना तय माना जा रहा है।
नगर निकायों पर भी बढ़ेगा भार
दर वृद्धि का असर नगर निकायों पर भी पड़ेगा। इंदौर नगर निगम जैसे शहरी निकाय स्ट्रीट लाइटिंग और जल आपूर्ति के लिए बड़ी मात्रा में बिजली का उपयोग करते हैं। जलूद से शहर तक पानी लाने और वितरण की प्रक्रिया में भारी बिजली खपत होती है। दर बढ़ने से नगर निगम के वार्षिक खर्च में भी वृद्धि होगी, जिसका अप्रत्यक्ष असर नागरिक सेवाओं पर पड़ सकता है।
राजनीतिक बयानबाजी तेज
दर वृद्धि के प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक माहौल भी गरम है। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि पिछले दो दशकों में बिजली दरें लगातार बढ़ी हैं और आम उपभोक्ता पर बोझ बढ़ा है। वहीं सत्तारूढ़ दल का कहना है कि बिजली कंपनियों की वित्तीय स्थिति सुधारने और बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए दर संशोधन आवश्यक है।
ऊर्जा मंत्री की समीक्षा बैठक
इस बीच प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी मुख्यालय में समीक्षा बैठक की। बैठक में आरडीएसएस (रीवैंप्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम) के तहत चल रहे कार्यों की प्रगति की जानकारी ली गई। अधिकारियों के अनुसार 97 में से 87 ग्रिडों का काम पूरा कर आपूर्ति शुरू कर दी गई है, जबकि लगभग 7700 ट्रांसफार्मर स्थापित किए जा चुके हैं।
अंडरग्राउंड केबलिंग, ग्रिड रिनोवेशन और लाइन सुधार के कार्य जारी हैं। मंत्री ने लापरवाही बरतने वाली एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए और गुणवत्ता परीक्षण को नियमित रूप से सुनिश्चित करने को कहा।
1 अप्रैल से लागू हो सकती हैं नई दरें
अब सबकी नजर नियामक आयोग के अंतिम फैसले पर है। परंपरागत रूप से नई बिजली दरें नए वित्त वर्ष यानी 1 अप्रैल से लागू की जाती हैं। यदि 10% से अधिक की वृद्धि को मंजूरी मिलती है, तो प्रदेशभर के लाखों उपभोक्ताओं के बिजली बिल में सीधी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।
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